हम पहाड़ियों को वर्ष भर कभी किसी मौसम में कोई परेशानी नहीं होती पहाडों में ,ऐसे जीते हैं जैसे स्वर्ग में जी रहे हों….…... मगर बरसात का मौसम शुरू होते ही कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है.......... मसलन जगह- जगह सड़कें अवरुद्ध हो जाती हैं, रास्ते टूट जाते हैं..., पेड़ गिर जाते हैं,.. पैदल रास्ते कीचड़ से फिसलन भरे हो जाते हैं, जोंकों का सामना करना पड़ता है…...........बिजली गिरने का खतरा होता है.......बादल फटने का डर होता है.......आदि आदि…... लेकिन इसका तात्पर्य यह बिल्कुल नहीं कि बरसात में यहाँ जीवन जिया ही नहीं जा सकता .....परेशानियाँ और समस्याएं जरूर हैं...मगर वह जीवन ही क्या जिसमें परेशानियाँ ही न हों। इन समस्याओं से तो हमें हर वर्ष जूझना पड़ता है, बस थोड़ा सा जोख़िम तो लेना ही पड़ता है.......... और यदि हममें से कोई ये कहे कि उसने बिना कोई जोख़िम लिए घुमक्कड़ी की है तो माफ़ कीजिए ,आप बिल्कुल सफेद झूठ बोल रहे हैं। बिना जोखिम के क्या घुमक्कड़ी सम्भव है???? यदि सम्भव है तो वह फिर घुमक्कड़ी नहीं हो सकती......