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असली आनन्द बरसात में

हम पहाड़ियों को वर्ष भर कभी किसी मौसम में कोई परेशानी नहीं होती पहाडों में ,ऐसे जीते हैं जैसे स्वर्ग में जी रहे हों….…... मगर  बरसात का मौसम शुरू होते ही कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है..........   मसलन जगह- जगह  सड़कें अवरुद्ध हो  जाती हैं, रास्ते टूट जाते हैं..., पेड़ गिर जाते हैं,.. पैदल रास्ते कीचड़ से फिसलन भरे हो जाते हैं, जोंकों का सामना करना पड़ता है…...........बिजली गिरने का खतरा होता है.......बादल फटने का डर होता है.......आदि आदि…...    लेकिन इसका तात्पर्य यह बिल्कुल नहीं कि बरसात में यहाँ जीवन जिया ही नहीं जा सकता .....परेशानियाँ और समस्याएं जरूर हैं...मगर वह जीवन ही क्या जिसमें परेशानियाँ ही न हों। इन समस्याओं से तो हमें हर वर्ष जूझना पड़ता है,    बस थोड़ा सा जोख़िम तो लेना ही पड़ता है.......... और यदि  हममें से कोई ये कहे कि उसने बिना कोई जोख़िम लिए   घुमक्कड़ी की है तो माफ़ कीजिए ,आप बिल्कुल सफेद झूठ बोल रहे हैं।  बिना जोखिम के क्या घुमक्कड़ी सम्भव है???? यदि सम्भव है तो वह फिर घुमक्कड़ी नहीं हो सकती......
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हरियाली काँठा यात्रा

***05 नवम्बर 2018*** 💐धन तेरस के दिन💐               प्रसिद्ध सिद्धपीठ माँ हरियाली देवी की हरियाली कांठा यात्रा अपने आप में एक अनोखी व अदभुत यात्रा है। हमें भी इस बार माँ हरियाली का बुलावा आया तो हम भी पहुँच गये धनतेरस की शाम 5:30 बजे उत्तराखण्ड राज्य के जसोली (रुद्रप्रयाग जिला) स्थित हरियाली देवी मंदिर में ..........      हमारी योजना यह पैदल यात्रा करने की कैसे बनी, जरा इस बारे में भी बता दूं। दरअसल हुआ यूँ था कि हम लोग जब इसी साल 31 मई को बैनीताल जा रहे थे तो उससे पहले हम हरियाली देवी मन्दिर में गए थे। और मन्दिर के पुजारी चमोली जी से हरियाली कांठा वाली यात्रा करने का वादा कर गए। चमोली जी से हमने इस यात्रा की थोड़ा बहुत जानकारी भी जुटा ली थी। उस दिन (31मई 2018) को मैं,धीरू भाई व मोहन भण्डारी जी बड़े ही शुभ अवसर पर यहाँ पहुंचे थे, जब मन्दिर परिसर में 100 फ़ीट ऊँचे  लोहे के खम्बे  को मशीन के द्वारा खड़ा किया जा रहा था, खम्बे के ऊपरी सिरे पर एक झण्डा लगाया गया था।       यह माता का आशीर्वाद ही था जो हमें भी इस खम्भे क...

*डोडीताल यात्रा 02*

दिनाँक 19 अक्टूबर 2017 :-----                     "आज डुंडा से डोडीताल " हर दिन की तरह ठीक सुबह 5:30 बजे मेरे मोबाइल में अलार्म बज गया,नींद खुल गई, धीरू भाई को भी जगा दिया,पर जैसे ही मैं फ्रैश होने गया धीरू भाई फिर सो गए।हाथ-मुँह धो कर आया तो फिर से धीरू भाई को जगाना पड़ा।तैयार होते-होते 6:30 बज गए। डुंडा से सुबह 6:30  बजे  किसी को बिना बताए मैं और धीरू भाई चल दिए...........आज हमें डोडीताल पहुँचना था ......वैसे हमारा डोडीताल दो दिन में पहुंचने का कार्यक्रम था मगर सेममुखेम भी जाना था वापसी में.......सो सब कुछ जल्दी जल्दी  करना था......नैथानी जी ने कल ही आने से मना कर दिया था .....सो सुबह किसी को तंग किये बिना ही चल दिये। डुंडा से डोडीताल जाने के लिए पहले उत्तरकाशी जाना पड़ता है........डुंडा से उत्तरकाशी की दूरी है 16 किमी.। उत्तरकाशी से ठीक पहले एक 400 मीटर लम्बी सुरंग है....वरुणावत पर्वत के ठीक नीचे............. आधे घण्टे में उत्तरकाशी पहुंच गए 7 बजे........... अब हमें गंगोरी  जाना था........गंगोरी उत्तरकाशी...

नचिकेता ताल/डोडीताल/सेममुखेम की यात्रा:-01

नचिकेता ताल के बाबा जी चौरंगीखाल में नचिकेता ताल जाने का गेट नचिकेता ताल मौसी जी के घर पर केमुण्डा खाल का मन्दिर नागेश्वरसौड़ से आगे प्राथमिक विद्यालय पैरकर             दिनाँक 18 अक्टूबर 2017...............                     " आज बसुकेदार से डुंडा  "     जब कुछ दिन पहले  अवकाश तालिका देखी तो मन में घुमक्कड़ी जागृत हो उठी,कि कहाँ जाया जाय ......उड़ान ग्रुप में डोडीताल का जिक्र भी कर दिया.....(उड़ान ग्रुप हम कुछ बसुकेदार के घुमक्कड़ मित्रों का ग्रुप है) पर दीपावली के कारण धीरू भाई के अलावा किसी ने भी हामी नहीं भरी.... हमारे ग्रुप के कुछ स्थाई घुमक्कड़ हैं जिन साथियों ने मेरे साथ काफी जगहों पर ट्रैकिंग की है..... 1- मनमोहन भट्ट:---...….मेरी तरह अध्यापक हैं ,घूमने फिरने के काफी शौकीन हैं मगर कुछ समय से स्वास्थ्य कारणों से ट्रैकिंग से तौबा कर ली है। मेरे साथ रुद्रनाथ,हेमकुण्ड साहिब,फूलों की घाटी,पँवाली कांठा ट्रैक कर चुके हैं।और सन् 2000 की नंदादेवी राज जा...